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तर्क एवं बहस डॉ. अमित कुमार दवे

तर्क एवं बहस   डॉ. अमित कुमार दवे तर्क साक्ष्य आधारित बिन्दु के संबन्ध में स्पष्टीकरण है जबकि बहस  विचारधारा पर निर्भर करती है।  किसी तथ्य के संबंध में हर व्यक्ति, संगठन, समुदाय की अलग विचारधारा हो सकती... वह अपने पक्ष को स्थापित करने के लिए अनर्गल तर्कों को भी प्रस्तुत कर सकता है। अनर्गल तर्काधारित बहस का कोई छोर नहीं होता। जबकि तथ्यात्मक विषयवस्तु अपने आप में तार्किक होती है। ऊसे अन्य तर्कों की कसौटी पर परखने की आवश्यकता नहीं रहती। सूर्य पूर्व में उदित होता है। यह तथ्य है। इस संबंध में आपकी व मेरी सटीक समझ तार्किक है। इसका कोई काट्य नहीं है। तथापि सूर्य के पूर्व में उदित होने के संबंध में संशय उत्पन्न करना व इस सम्बंध में तर्क देना अनर्गल तर्क कहे जाएँगे। अनर्गल तर्क के माध्यम से संशय की स्थिति को बढावा देते हुए स्थापित तथ्य के संबंध में नकारने का प्रयास.. अथवा खण्डन बहस के अन्तर्गत रहता है। तर्क सैद्धांतिकता लिए रहता है। बहस व्यावहारिक एवं प्रत्यक्ष रहती है। © तर्क एवं बहस   डॉ. अमित कुमार दवे