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Showing posts from January, 2022

लोकबोध-२

वैश्विकगणराज्यपदवीं प्राप्त्यर्थं राजव्यवहाराणां परिष्कार: अनिवार्यः वर्तते।।२।। ©डॉ. अमित कुमार दवे, खड़गदा

आओ!मिलकर नव भारत को वैश्विक गणराज्य बनाएँ ©डॉ. अमित कुमार दवे, खड़गदा

आओ!मिलकर नव भारत को वैश्विक गणराज्य बनाएँ                           ©डॉ. अमित कुमार दवे, खड़गदा आओ ! मिलकर भारत को ऐसा गणराज्य बनाएँ जिसमें हर जन का नेतृत्व सुनिश्चित् करवाएँ। शिक्षा-चिकित्सा-न्याय-परिवहन-सुरक्षा गण की.. सहज ही निज गणराज्य में सुनिश्चित् करवाएँ।   जाति-धर्म-क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर जीवन का.. मान करे, विश्व का नव प्रतिमान बने, ऐसे गणराज्य का नव प्रारूप बनाएँ, मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाएँ, हाँ! अब तो छलनीति से इतर राजनीति करवाएँ। हर तथ्य के बहुपक्षों से ऊपर जीवन पक्ष को महत्त्व दें. गरीब-गरीबी के नाम को त्याग विकास ही कर्म बनाएँ जीवन के हर पहलूँ को उन्नत से उत्कृष्ट बनाएँ..ऐसे.. नव गणराज्य के प्रारूप की सहज़ ही स्थापना करवाएँ।। अपनी ही नीतियों में उलझे राष्ट्रजन के व्यवहारों को  शुचिता का सहज़ संसर्ग करवा अनुकरणीय बनवाएँ एक राष्ट्र में एक बात एक ही अर्थ सुनिश्चित करवाएँ आओ!मिलकर नव भारत को वैश्विक गणराज्य बनाएँ।। सादर प्रस्तुति ©डॉ. अमित ...

मकर संक्रांति ; भारतीय प्राकृतिक त्योहार डॉ.अमित कुमार दवे

मकर संक्रांति ; भारतीय प्राकृतिक त्योहार ©डॉ.अमित कुमार दवे मकर संक्रांति का त्योहार भारतवर्ष में विशिष्ट स्थान लिए हुए है। अपार शीत के बाद में ऊर्जा पूंज सूर्य अपनी प्रखर किरणों से समग्र विश्व जन को सुख-शांति- समृद्धि प्रदान करने हेतु जनजीवन को सम गति प्रदान करते हुए धनराशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर राशि में प्रवेश करने के कारण ही इस त्योहार को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। सूर्य दक्षिणायन (दक्षिण दिशा में) में गमन करता है तो आप और हम सब यह जानते हैं कि दक्षिण दिशा में सूर्य का गमन अंटार्कटिका जैसे निर्जन एवं हिम बहुल प्रभाग में  होता है। शीत बहुल प्रदेश में सूर्य का गमन जनजीवन के लिए जरूरी परिणामों का दायक नहीं होता। दक्षिण दिशा की जो स्थिति है उसमें सूर्य अपने आपको शीत बहुलता के कारण  स्वयं शीत के प्रभाव में रहता है। यही कारण है कि वह वैश्विक जन को ऊन दिनों में नियमित गति देने में असहज रहता है।  तेज पूंज सूर्य 6 माही दक्षिण दिशा का भ्रमण करते हुए पुनः उत्तर दिशा की ओर गमन करते लगते हैं। इस संपूर्ण सृष्टि के उत्तर भाग में जनजीवन का निवास विशिष्टतः मा...

नेताजी श्रीबोस के योगदानों का आभारी है भारत" ©डॉ.अमित कुमार दवे, खड़गदा

"नेताजी श्रीबोस के योगदानों का आभारी है भारत"                      ©डॉ.अमित कुमार दवे, खड़गदा बिखरे भारत को पुनः जोडने के प्रयास करने वाले, अनपेक्षित साम्राज्य की नीवों को डोलाने वाले, बिखरते राष्ट्र को सूत्र एक में फिर पिरोने वाले, नेताजी श्रीबोस के योगदानों का आभारी है भारत।। जनता को गुमराह करने वालों के विरूद्ध बोलने वाले, कमज़ोर राष्ट्र की छवि जग से फिर मिटवाने वाले, कोरी सत्ता लालसा रखने वालों को पहचानने वाले, नेताजी श्रीबोस के योगदानों का आभारी है भारत।। सत्ता के नाम जनता का बँटवारा करने वालों के विरुद्ध निर्भिक हो विद्रोह की आग सम्पूर्ण विश्व में जलाने वाले तुम मुझे खुन दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा का सूत्र देने वाले नेताजी श्रीबोस के योगदानों का आभारी है भारत।। कल के कारनामों में कल की छवि नित्य देखने वाले, भोली हिन्दूस्थानी जनता के हितों की रक्षा करने वाले, सही कार्यों के बदलें भी राष्ट्र से निर्वासित होने वाले, नेताजी श्रीबोस के योगदानों का आभारी है भारत।। सादर प्रस्तुति ©डॉ.अम...

देश को आज विवेक चाहिए

देश को आज विवेक चाहिए              ©डॉ.अमित कुमार दवे, खड़गदा देश को आज विवेक चाहिए- सार्वकालिक महापुरुषों में… सनातन आदर्शों में…. वैश्विक विचारों में… अनुकरणीय मूल्यों में….।। सच!आज देश को विवेक चाहिए- संपादित व्यवहारों में…. जीवन संस्कारों म़े…. सामाजिक संंबन्धों में…. आपसी संवादों में….।। हाँ आज देश को विवेक चाहिए- शैक्षिक संरचनाओं में…. तकनीकी व्यवहारों में…. आचरित चरित्रों में…. प्रसारित सूचनाओं में…. देश को फिर आज विवेक चाहिए- उन्नत नागरिकता में… तेजस्वी उद्बोधनों में…. राष्ट्रीय राज्यनीति में…. उत्कृष्ट अर्थनीति में... सुनों ! आज देश को विवेक चाहिए- नव साहित्य के सृजन में.. सटिक शब्द व्यहरण में.. शास्त्र अनुशीलन मे….. आत्मिक अवबोधन में…. हाँ..! आज वही विवेक का .. देश के उत्थान को विवेक चाहिए..।। सादर प्रस्तुति ©डॉ.अमित कुमार दवे, खड़गदा

।।लोक बोध-१।।

लोक बोध-१ ।।आत्ममुग्धानाङ्कृते जगती कोsपि यशस्वन्तः न भवति।। ©डॉ.अमित दवे, खड़गदा