मकर संक्रांति ; भारतीय प्राकृतिक त्योहार डॉ.अमित कुमार दवे

मकर संक्रांति ; भारतीय प्राकृतिक त्योहार

©डॉ.अमित कुमार दवे

मकर संक्रांति का त्योहार भारतवर्ष में विशिष्ट स्थान लिए हुए है। अपार शीत के बाद में ऊर्जा पूंज सूर्य अपनी प्रखर किरणों से समग्र विश्व जन को सुख-शांति- समृद्धि प्रदान करने हेतु जनजीवन को सम गति प्रदान करते हुए धनराशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर राशि में प्रवेश करने के कारण ही इस त्योहार को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।


सूर्य दक्षिणायन (दक्षिण दिशा में) में गमन करता है तो आप और हम सब यह जानते हैं कि दक्षिण दिशा में सूर्य का गमन अंटार्कटिका जैसे निर्जन एवं हिम बहुल प्रभाग में  होता है। शीत बहुल प्रदेश में सूर्य का गमन जनजीवन के लिए जरूरी परिणामों का दायक नहीं होता। दक्षिण दिशा की जो स्थिति है उसमें सूर्य अपने आपको शीत बहुलता के कारण  स्वयं शीत के प्रभाव में रहता है। यही कारण है कि वह वैश्विक जन को ऊन दिनों में नियमित गति देने में असहज रहता है। 

तेज पूंज सूर्य 6 माही दक्षिण दिशा का भ्रमण करते हुए पुनः उत्तर दिशा की ओर गमन करते लगते हैं।


इस संपूर्ण सृष्टि के उत्तर भाग में जनजीवन का निवास विशिष्टतः माना जाता है। उत्तर की तरफ जब सूर्य का गमन सुनिश्चित होता है तब इस दिवस को उत्तरायण भी कहा जाता है । मकर सक्रांति और उत्तरायण संपूर्ण विश्व के जनजीवन को संतुलन प्रदान करते हुए  स्वास्थ्य विकास, समृद्धि, खुशहाली को सुनिश्चित करता है अतः उत्तरायण का यह दिवस उत्सव रूप में मनाया जाता है। 


कश्मीर में शिशुर सेक्रांत, हिमाचल प्रदेश में माध साजी, पंजाब, चंडीगढ़ एवं हरियाणा में लोहड़ी, उत्तराखंड में घुघुतिया त्यार एवं उत्तरायणी, गुजरात में उत्तरायण पर्व, कर्नाटक में मकर संक्रमण, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार,उत्त्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू , अरुणाचल प्रदेश में मकर संक्रांति, झारखंड में टुसू पर्व, उडिसा में मकरचौला, पश्चिम बंगाल-त्रिपुरा में पौष संक्रांति, असम, मेघालय, मिजोरम में माघी बिहू आदि नामों से यह उत्तरायण पर्व(मकर संक्रांति)संपूर्ण भारत वर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार के साथ ही सभी शुभ कार्यों का शुभारंभ सत्भर के लिए होता है। मकर संक्रांति का यह पर्व हमारे जीवन को भी अपार ऊर्जा, समृद्धि, बुद्धि एवं सामर्थ्य से युक्त करे,ऐसी प्रार्थना...।


सादर प्रस्तुति

©डॉ.अमित कुमार दवे, खड़गदा


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