लोकबोध -०४

लोकबोध-०४

अपयशं जनयति
केवलं यशोपासना।
धवलकीर्तिप्राप्त्यर्थं
लोककल्याणमाचरेत्।।

©अमित कुमार दवे, खड़गदा

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