लोक बोध -०५

मूलस्य वेदनम् -0५

इह जगती कोSपि निर्मूलं नास्ति किन्तु स्वमूलस्य संज्ञानमनिर्वचनीयं वर्तते। मूलवेदनं विना कार्याचरणं पतनस्यैव कारणं जायते।

©अमित कुमार दवे, खड़गदा

Comments

Popular posts from this blog

भाषा, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ©डॉ.अमित कुमार दवे

तर्क एवं बहस डॉ. अमित कुमार दवे

ऐसा वर दो हे वीणावादिनी ©डॉ. अमित कुमार दवे, खड़गदा