विभिन्न स्तरों पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य डॉ.अमित कुमार दवे

            विभिन्न स्तरों पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य

 

हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य

 

किसी भी कार्य का जब आयोजन किया जाता है तो सर्वप्रथम उसके उद्देश्य का निर्धारण अनिवार्य हो जाता है | शिक्षक जो  शिक्षण कार्य करवा रहे होते हैं तो शिक्षण के दौरान  उन्हें किन- किन उद्देश्यों की पूर्ति करनी है ? यह सुनिश्चित करना  अति आवश्यक है | उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया गया  शिक्षण निश्चित है सुफलदाई एवं प्रभावी सिद्ध होता है|

 

 हिंदी शिक्षण के दौरान कक्षा कक्षा में शिक्षक को क्या शिक्षण कराना है? यह सुनिश्चित करना अति आवश्यक हो जाता है |  हिंदी शिक्षण के दौरान    शिक्षक के लिए यह भी अति महत्वपूर्ण हो जाता है कि हिंदी का शिक्षण क्यों कराया जा रहा है? हिंदी भाषा का शिक्षण करवाने के पश्चात किन-किन परिणामों की प्राप्ति की जानी है|  राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा को कक्षा- कक्षा में पढ़ाया जाता है । कक्षा में हिंदी भाषा का शिक्षण कराने के पीछे जो राष्ट्रीय सोच है वह बड़ी व्यापक है | इस सोच के अनुरूप हिंदी भाषा राष्ट्र की संपर्क -संवाद की भाषा के रूप में हर जन की भाषा बनाएँ, यह प्रमुख उद्देश्य है| इसी के साथ राष्ट्र का प्रत्येक जन हिंदी भाषा में बोल सकें एवं दूसरों के द्वारा बोले हुए को समझ सके|  जब हिंदी भाषा के संबंध में व्यापक एवं जनोपयोगी लोकहितार्थ सोच के साथ में हिंदी शिक्षण कार्य कराया जाएगा तो निश्चित ही राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने में समर्थ हुआ जा सकेगा|

 

 

 हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्यों को निम्न  प्रकार से नियोजित कर समझ सकते हैं –

 

 प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य

  बालक जब प्रथम बार विद्यालय में प्रवेश लेता है तब उसकी भाषा किसी आकार में नहीं होती है तब उसमें भाषा की समझ एवं पहचानात्मक व्यवस्था शुरू की जाती है । प्राथमिक स्तर पर बच्चों में सुनना बोलना कौशल के विशिष्ट विकास हेतु प्रयास किया जाता है ।साथ ही अक्षर,शब्द ,वाक्य गठन एवं पठन तक के प्रयास किए जाते हैं। 

 

उक्त बिन्दुओं की पूर्ति  हेतु प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण  के उद्देश्य निम्न हैं—

 

 1 बालकों में उच्चारण की समझ उत्पन्न करना।

2 बालकों को वर्णों की समझ से युक्त करना ।

3 बालकों के विचार क्षेत्र को धीरे-धीरे व्यापक स्तर तक ले जाना।

4 बालकों में बोलने की क्षमता का विकास करना।

5 दूसरों के बोले हुए को समझने की क्षमता उत्पन्न करना ।

6 बालकों में वर्ण, शब्द ,वाक्य की समझ उत्पन्न करना। 7 साथ ही इनके उचित उपयोग हेतु कौशल उत्पन्न करना।

 8 श्रवण, भाषण, पठन एवं लेखन की समझ उत्पन्न करना ।

9 बालकों में शब्द भंडारण एवं उनके क्रमशः उपयोग की क्षमता उत्पन्नपन करना ।

10 बालकों के विचारों को स्पष्ट एवं नियोजित करना । 11 आरोह-अवरोह के साथ में पठन की क्षमता उत्पन्न करना ।

12 शुद्ध उच्चारण, शुद्धलेखन तथा शुद्ध वाचन की क्षमता उत्पन्न करना ।

13 वाचन की गति को सुनियोजित करना, स्पष्टता लाना।

14  बालकों के वाचन को शुद्ध स्पष्ट एवं प्रभावोत्पादक बनाना।

15 सृजन हेतु प्रेरित करना हिंदी भाषा के प्रति रुचि उत्पन्न करना ।

16 साथ ही हिंदी भाषा की समझ बनाना 

17 भावाभिव्यक्ति हेतु प्रेरित करना।

18  दूसरों के भावों को समझने हेतु समर्थ बनाना ।

19 हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि का प्रारंभिक ज्ञान कराना साथ ही उसके उच्चारण एवं लेखन का अभ्यास कराना ।

20 अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करना ।

21 शब्दावली,सुलेख,स्वाध्याय,अनुलेख,श्रुतलेख, का अभ्यास कराना ।

22 छात्रों की समझ शक्ति को विकसित करना।

23 अपने आसपास के अनुभव को समझने हेतु तैयार करना। साथ ही उन्हें अभिव्यक्त करने हेतु प्रेरित करना।

24 विद्यालय में पड़ी हुई सामग्री का देश काल परिस्थिति के अनुसार उपयोग हेतु तैयार करना।

25  बालकों में पढ़ने की आदत का विकास करना। पढ़ने की गति को बढ़ाना,शुद्ध -स्पष्ट करना। साथ ही पठनीय सामग्री की विषय वस्तु को समझने की क्षमता उत्पन्न करना।

 

 माध्यमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य

 माध्यमिक  स्तर छात्र के जीवन का अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण अध्ययन स्तर है। इस स्तर से बालक वास्तविक जीवन जीने हेतु तैयार होता है । इस स्तर पर भाषा का शिक्षण भी अति महत्वपूर्ण हो जाता है । माध्यमिक स्तर पर अध्यापक भावी जीवन में भाषायी व्यवहार एवं समझ को सुनिश्चित करता है।

 

 इस स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य निम्न हैं-

 

 1 भाषायी कौशलों को प्राथमिक स्तर से अधिक विकसित करना।

2 छात्रों में संवाद की क्षमता उत्पन्न करना ।

3 कविता पठन कर  उसके भाव को ग्रहण करने की क्षमता उत्पन्न करना।

4  छात्रों को भाषायी तत्त्व की जानकारी प्रदान करना। 5 व्याकरण आधारित भाषाई अध्ययन हेतु प्रेरित करना।

6 भाषा के प्रति बालकों में रुचि उत्पन्न करना।

7  प्राथमिक स्तर से बालकों में शब्द भंडारण की वृद्धि करना एवं उपयोग हेतु प्रेरित करना .

8 पठन - पाठन एवं लेखन में पूर्व से अधिक दक्ष बनाना ।

9  बालकों के भाषायी संवाद को विकसित करना।

10 लेखन को सुस्पष्ट,सुंदर एवं सारगर्भित बनाने हेतु प्रेरित करना।

 11 निबंध,पत्र,संवाद, सारांश आदि के माध्यम से लेखन कौशल को विकसित करने का प्रयास करना। 12 स्वाध्याय की क्षमता का विकास करना एवं भाषायी समझ विकसित करना।

13  लेखक के भावों- विचारों एवं गहन अर्थों को समझने की क्षमता उत्पन्न करना .

14बालकों को सस्वर वाचन, द्रुत वाचन, मौन वाचन हेतु तैयार करना साथ ही साहित्य के प्रति रुचि की आधारशिला रखना ।

15 अभिनय,संवाद एवं अनुकरण की योग्यता उत्पन्न करना।

16  बालकों में व्याकरण के प्रति रुचि उत्पन्न करना एवं व्याकरण के सामान्य नियमों से परिचित करना।

17 भाषा को सुदृढ़ बनाने में सहयोग प्रदान करना।

 

उच्च माध्यमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य

 

 उच्च माध्यमिक शिक्षा स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के निम्न उद्देश्य हैं --

1 बालकों में मौखिक एवं लिखित भाषा प्रयोग की क्षमताओं को विकसित करना एवं सुनकर एवं भाव ग्रहण करने की क्षमता उत्पन्न करना।

2  बालकों में साहित्यिक समझ उत्पन्न करना

3 बालकों को भाषा के अधिक से अधिक प्रयोग हेतु प्रेरित करना एवं  बालकों में अध्ययन करने की प्रवृत्तिओं को विकसित करना ।

4 बालकों के ज्ञान भंडार को पूर्व से अधिक विकसित करना साथ ही उपयोग हेतु प्रेरित करना।

5  बालकों में सृजनात्मक योग्यताओं को विकसित करने के लिए विभिन्न पक्षों की जानकारी प्रदान करना । 6 बालकों को हिंदी साहित्य की विविध विधाओं की जानकारी देना एवं उनके अध्ययन हेतु प्रेरित करना। 

7 बालकों को अध्ययन के लिए प्रेरित करना जिससे चिंतन और मनन की प्रवृत्ति का विकास हो सके।

8  भाषाई कौशलों में निपुणता लाने हेतु पूर्व से अधिक प्रयास करना ।

9 हिंदी साहित्य के विविध पक्षों की जानकारी प्रदान करना ।

10 बालकों में लिखित तथा मौखिक भाषा के द्वारा भाव ग्रहण करने एवं भावों को अभिव्यक्त करने की क्षमता उत्पन्न करना।

11  बालकों को अपने विचारों को सुंदर, सहज, स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने हेतु तैयार करना।

 

 राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी शिक्षण के उद्देश्य 

1 बालकों में हिंदी समझने की क्षमता उत्पन्न करना । 

2 हिंदी में लिखित विचारों को समझने की क्षमता विकसित करना।

3  बालकों को हिंदी में अपने विचारों की मौखिक एवं लिखित  अभिव्यक्ति की क्षमता उत्पन्न करना।

4  उचित हाव भाव के साथ हिंदी भाषा पढ़ने की योग्यता विकसित करना।

5 भारतीय संस्कृति में रुचि उत्पन्न करना साथ ही आकर्षित करना ।

6 हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं से बालकों को अवगत कराना एवं पढ़ने हेतु प्रेरित करना ।

7 बालकों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित करना ।

8 राष्ट्रीय संवाद कायम करना।

9  बालकों में भाषायी व्यवहार एवं सामाजिक व्यवहार की क्षमता उत्पन्न करना।

10 केंद्र तथा विभिन्न प्रांतों के प्रशासनिक कार्यों को कुशलतापूर्वक करने योग्य बनाना।

11  राष्ट्रीय परंपराएं,मान्यताएं, अध्यात्मिक आदर्शों को समझने की क्षमता विकसित करना।

12  राष्ट्र के आर्थिक,सामाजिक एवं प्राकृतिक स्वरूप को समझने की क्षमता विकसित करना। 

13 भारत की भाषाई समस्या एवं संकीर्णता  दूर करना।

14  हिंदी भाषा में ज्ञान के ज्ञान भण्डार को समझना साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं की गरिमा एवं महत्त्व को बनाए रखना।

 

डॉ.अमित कुमार दवे

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