लक्ष्मी की प्रसन्नता कर्म पर निर्भर नहीं होती वरन भाग्याधीन होती है....और भाग्य सदैव प्रारब्धाधीन होता है...अतः लक्ष्मी प्रसादार्थ प्रारब्ध संचयन हेतु प्रयास करें।
भाषा, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 डॉ.अमित कुमार दवे सहायक आचार्य शिक्षा संकाय(लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, डबोक) जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ(डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय),उदयपुर amit.dave50@yahoo.com +91-9414567296 शिक्षा नीतियाँ सदैव संबंधित राष्ट्र के भविष्य का वर्तमान दस्तावेज़ रही हैं। शिक्षा नीति का मार्ग अपना कर प्रत्येकक राष्ट्र अपनी स्वप्निल उर्ध्वगति को पाने का प्रयास करता है । इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत राष्ट्र के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की संरचना कर लागू की गई । वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय पुरा गौरव 'अतुल्य' रहा है। अतुल्य भाषा,कला एवं संस्कृति के परिणाम स्वरुप भारत राष्ट्र सदैव 'अतुल्य भारत' के रूप में स्थित रहा। मुगलों एवं अंग्रेजों ने आततायी प्रभावों के परिणाम स्वरूप भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं इतिहास को धूमिल एवं क्षत-विक्षत करने का सतत् प्रयास किया जिसमें वे सफल भी रहे। सैकड़ों वर्षो तक विदेशी प्रभावों में पस्त होता भारत राष्ट्र अपनी भाषा, संस्कृति, सभ्यता एवं कला ...
Comments
Post a Comment